Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
कैसे पता करें कि यह हारà¥à¤Ÿ अटैक का दरà¥à¤¦ है
फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² शालीमार बाग, नई दिलà¥à¤²à¥€ में वरिषà¥à¤ करà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ और इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¿à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ डॉ नितà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¤‚द तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤¾à¤ ी कहते हैं, “अगर किसी वजह से सीने में à¤à¤‚जाइना है तो यह बैठने से ठीक हो जाता है, खड़े होने पर या चलने पर यह बढ़ जाता है. इसके अलावा खाना खाके या कोलà¥à¤¡ वेदर में चलने से à¤à¥€ यह दरà¥à¤¦ बढ़ जाता है. बैठने से या आराम करने से यह दरà¥à¤¦ ठीक हो जाता है लेकिन हारà¥à¤Ÿ अटैक में लगातार दरà¥à¤¦ होता है और यह आधे घंटे से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर तक रह सकता है. कà¥à¤› लोगों को जबड़े में दरà¥à¤¦ होता है तो कà¥à¤› लोगों को हाथ में दरà¥à¤¦ होता है. हारà¥à¤Ÿ अटैक के बाद अलग-अलग लोगों में अलग-अलग तरह के लकà¥à¤·à¤£ दिखते हैं. यहां तक कि कà¥à¤› लोगों को पेट के उपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ में à¤à¥€ दरà¥à¤¦ हो सकता है. उसे à¤à¤¸à¤¾ लगता है कि यह गैस का दरà¥à¤¦ है लेकिन हारà¥à¤Ÿ अटैक वाले दरà¥à¤¦ में देर तक दरà¥à¤¦ करना सबसे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ है.†डॉ नितà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¤‚द तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤¾à¤ ी ने बताया कि कà¥à¤› लोगों दरà¥à¤¦ नहीं à¤à¥€ हो सकता है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सांस फूलता है या लगता है कि बà¥à¤²à¥‰à¤Ÿà¤¿à¤‚ग यानी पेट में गैस à¤à¤° गई है. इन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ हारà¥à¤Ÿ अटैक आ सकता है. इसलिठकिसी à¤à¥€ तरह का दरà¥à¤¦ हो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ईसीजी, कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² लेवल, टीà¤à¤®à¤Ÿà¥€ कराना चाहिà¤. अगर ईसीजी से पता नहीं चलता है तो अनà¥à¤¯ टेसà¥à¤Ÿ कराठजाते हैं.
शà¥à¤—र, बीपी के मरीजों को दिकà¥à¤•त
जो लोग डायबेटिक हैं, सà¥à¤®à¥‹à¤•र हैं जिनका बीपी बढ़ा हà¥à¤† है, उनमें हारà¥à¤Ÿ अटैक का खतरा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है. उनमें à¤à¤¸à¤¾ à¤à¥€ हो सकता है कि à¤à¤Ÿà¤¿à¤ªà¤¿à¤•ल चेसà¥à¤Ÿ पेन हो. यानी सामानà¥à¤¯ दरà¥à¤¦ से अलग तरह का दरà¥à¤¦ हो. इसमें मरीज को हो सकता है कि बैठे-बैठे दरà¥à¤¦ उठजाठया खाना खाने के बाद थोड़ा दरà¥à¤¦ हो. à¤à¤¸à¥‡ लोगों को ईसीजी, इको और टीà¤à¤®à¤Ÿà¥€ कराना चाहिà¤. इससे पता चलेगा कि हारà¥à¤Ÿ अटैक हà¥à¤† या नहीं या आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€ में बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज है तो कितना है. अगर मरीज को हारà¥à¤Ÿ अटैक हà¥à¤† और धीरे-धीरे सही हो गया लेकिन वह डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास नहीं गया तो बीमारी कम नहीं होती बलà¥à¤•ि उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¤¸à¥‡ मरीजों में सडेन डेथ की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाती है. यह किसी à¤à¥€ मरीज के साथ हो सकता है. इसलिठछाती में लगातार दरà¥à¤¦ होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास अवशà¥à¤¯ जाना चाहिà¤.
हारà¥à¤Ÿ अटैक में अचानक मौत की कà¥à¤¯à¤¾ वजह है
डॉ नितà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¤‚द तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤¾à¤ ी ने कहा कि हारà¥à¤Ÿ अटैक में अचानक मौत की सबसे बड़ी वजह à¤à¤°à¤¿à¤¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (sudden arrhythmia)हैं. जैसे जिम में किसी की अचानक मौत हो गई, अचानक चलते-चलते मौत हो गई या बैठहà¥à¤ ही मौत हो गई तो इन सबका कारण à¤à¤°à¤¿à¤¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ है. इसमें सडेन डेथ का जोखिम बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ जाता है. जैसे ही हारà¥à¤Ÿ अटैक होता है, हारà¥à¤Ÿ में जाने वाली कोरोनरी आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€ बà¥à¤²à¥‰à¤• हो जाती है और जहां पर बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज है वह हिसà¥à¤¸à¤¾ डैमेज हो जाता है. इससे सडेन डेथ का खतरा कई गà¥à¤¨à¤¾ बढ़ जाता है. डॉ तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤¾à¤ ी ने बताया कि अगर किसी को हारà¥à¤Ÿ अटैक हà¥à¤† हो और इसका पता न चला हो तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में उसके बचने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो सकती है लेकिन कà¥à¤› मामलों में अगर हारà¥à¤Ÿ अटैक का पता नहीं चला. यानी दरà¥à¤¦ के बगैर हारà¥à¤Ÿ अटैक आ गया तो उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सडेन कारà¥à¤¡à¤¿à¤à¤• डेथ का खतरा रहता है. à¤à¤¸à¥‡ लोगों में दो-चार दिन के अंदर ही मौत हो जाती है.
हारà¥à¤Ÿ अटैक के बाद कà¥à¤¯à¤¾ होता है
जैसे ही हारà¥à¤Ÿ अटैक होता है, हारà¥à¤Ÿ में जाने वाली कोरोनरी आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€ बà¥à¤²à¥‰à¤• हो जाती है. कोरोनरी आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€ से ही खून हारà¥à¤Ÿ में पहà¥à¤‚चता है जहां से खून शà¥à¤¦à¥à¤§ होकर ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ के साथ पूरे शरीर में पहà¥à¤‚चाया जाता है. इससे हारà¥à¤Ÿ सही तरह से अपना फंकà¥à¤¶à¤¨ नहीं कर पाता है. अगर नसों में बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज को नहीं हटाया गया तो हारà¥à¤Ÿ का वह हिसà¥à¤¸à¤¾ जहां बà¥à¤²à¤¡ सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ रूका हà¥à¤† है, वह डैमेज हो जाता है. इससे हारà¥à¤Ÿ फेलà¥à¤¯à¥‹à¤° हो जाता है. अगर इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वीटीवीà¤à¤« हà¥à¤† तो मरीज में सडेन कारà¥à¤¡à¤¿à¤à¤• अरेसà¥à¤Ÿ होगा और मरीज की ततà¥à¤•ाल मौत हो जाà¤à¤—ी. अगर इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मरीज को असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² लाया जाता है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° उसे शॉक देते हैं. इसके बाद रिवरà¥à¤Ÿ करते हैं.
हारà¥à¤Ÿ अटैक से कैसे बचें
चेसà¥à¤Ÿ में पेन हो रहा है या आपको पता नहीं है कि कà¥à¤¯à¤¾ हà¥à¤† लेकिन सीने में असहजता लगातार महसूस हो तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाà¤à¤‚. डॉकà¥à¤Ÿà¤° ईसीजी टेसà¥à¤Ÿ के आधार पर आगे की सलाह देंगे. आमतौर पर हारà¥à¤Ÿ अटैक के लकà¥à¤·à¤£ पहले से नहीं दिखते हैं लेकिन कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ à¤à¤¸à¥‡ हैं जो हारà¥à¤Ÿ अटैक का संकेत दे सकते हैं. जैसे-
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ लकà¥à¤·à¤£
गरà¥à¤¦à¤¨, जबड़ा, पीठऔर बाà¤à¤‚ हाथ के नीचे में दरà¥à¤¦ होना.
बेचैनी और घबराहट.
सांस फूलना.
चकà¥à¤•र आना.
महिला-पà¥à¤°à¥à¤· में अलग-अलग लकà¥à¤·à¤£
टà¥à¤µà¤¿à¤Ÿà¤° पर डॉ दीकà¥à¤·à¤¾ शà¥à¤°à¥€ बताती हैं कि हारà¥à¤Ÿ अटैक के सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ महिला और पà¥à¤°à¥à¤· में अलग-अलग हो सकते हैं. पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में महिलाओं को छाती में दरà¥à¤¦ का अनà¥à¤à¤µ कम होता है. इसके बजाय महिलाओं में अनà¥à¤¯ तरह के लकà¥à¤·à¤£ देखे गठहैं. अधिकांश महिलाओं में हारà¥à¤Ÿ अटैक से पहले छाती में दरà¥à¤¦ तो नहीं होता लेकिन उसमें बहà¥à¤¤ अधिक थकान, बहà¥à¤¤ अधिक कमजोरी, मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€, हारà¥à¤Ÿ बरà¥à¤¨ और हाथों से पसीना आने की शिकायत हो सकती है.
हारà¥à¤Ÿ अटैक से बचना है तो इन चीजों को जीवन से निकालें-
गतिहीन जीवनशैली.
अनहेलà¥à¤¦à¥€ डाइट.
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤².
शराब का सेवन.
मोटापा.
डायबिटीज.
सà¥à¤®à¥‹à¤•िंग.
कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² का बढ़ना.
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤®à¤¿à¤¨à¤¾ बूसà¥à¤Ÿ करने के लिठसपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट.
हाई बीपी.
| --------------------------- | --------------------------- |